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तिल चौथ | वक्रतुण्डी चतुर्थी | तिलकुटा चौथ व्रत विधि | Vakratundi Chaturthi, Tilakuta Chauth, Til Chauth , Sankat Chauth

एक बार माँ पार्वती ने श्री गणेश से पूछा, हे पुत्र! माघ बदी चौथ जिसे तिल चौथ, माही चौथ और संकट चौथ भी कहा जाता है के व्रत का विधान क्या है और इस चौथ का नाम तिल चौथ क्यों हुवा? तब रिद्धि सिद्धि के दाता गजानन ने बताया कि इस व्रत को करने से समस्त बाधाये दूर होती है साथ ही संतान की प्राप्ति के लिए तिल चौथ माता की पूजा करते है | जिन माताओं के संतान है वह इस व्रत को अपनी संतान की खुशहाली के लिए करे। 

पदम पुराण के अनुसार आज ही के दिन कार्तिकेय के साथ पृथ्वी की परिक्रमा लगाने की प्रतिस्पर्धा में गणेश जी ने पृथ्वी की बजाय पिता भोलेनाथ और माता पार्वती की सात बार परिक्रमा की थी। तब से गणेशा देवों में प्रमुख माने गए और उनको प्रथम पूजा का अधिकार दिया था। 

इस दिन भगवान भालचंद्र गणेश के स्वरूप और तिल चौथ माता की पूजा होती है और उनको तिलकुट्टे का भोग लगाया जाता है | भारत में इस व्रत को उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में मनाया जाता है।

Til Kuta Prasad
तिल चौथ की विधि -

माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को यह व्रत किया जाता है, इस दिन महिलाये निर्जला व्रत रखती है | 
- इस दिन स्नानादि के बाद पहले पूजा की थाली तैयार करे जिसमे दीया, पानी का कलश, पूजा के फूल, कुंकुम, चावल, रोली, मेहँदी आदि रखे | 
- फिर तिल और गुड़ को कूट कर प्रसाद तैयार करे | 
- इसके बाद एक लकड़ी का पाटा (चौकी) ले उस पर लाल रंग का स्वच्छ कपडा बिछाये फिर गणेश और चौथ माता की मूर्ति स्थापित करे | 
- विधिवत पूजा करे और भोग लगाए | 
- इसके बाद गणेश मन्त्र का जाप करे - 
"गजाननं भूत गणादि सेवितं,कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम्। 
उमासुतं शोक विनाशकारकम्, नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम्॥" 

- अंत में तिल चौथ माता की कहानी पढ़े | (यहां पढ़े - तिल चौथ व्रत कथा ) 
- रात को चाँद की पूजा करके भोजन करे | भगवान को चढ़ाया प्रसाद जरूर खाये | 

तिल चौथ का उजमन (उद्दीपन) कैसे करे ? 
लड़की की शादी के बाद आने वाली पहली माघ माह की कृष्ण पक्ष चौथ को (तिल / माही चौथ के दिन) सवा किलो का या सवा पाव (कोई भी सवा का तोल) तिल और गुड़ का तिलकुट्टा (तिल और शक़्कर का भी बना सकते है) चौथ माता और गणेश जी को चढ़ाना चाहिए | उस दिन तेरह सुहागिनों को भोज करावे या फिर घेवर कल्प के भी दे सकते है | सुहाग का सामान, साड़ी, चाँदी की पायल और बिछिया, सोने का लोंग, कांच की चूडिया, बिंदी आदि सामान कल्प कर सासु जी या नन्द को देवे नहीं तो सुहागिन ब्राह्मणी को देवे | 

तिल चौथ माता की जय |

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