भारतीय परम्परा

33-koti Dev

33 कोटी देवी देवता

हिंदू धर्म में 33 कोटि देवी देवताओं का वर्णन है। परंतु 33 कोटी का अर्थ 33 करोड़ नहीं बल्कि 33 उच्च कोटि (प्रकार) के देवी देवता। देव अर्थात दिव्य गुणों से युक्त, जिनमें 12 आदित्य, 11 रूद्र, 8 वसु और 2 अश्विनी कुमार है।
12 आदित्य - 12 आदित्य हमें हमारे सामाजिक जीवन के 12 भागों एवं वर्ष के 12 माह के विषय में दर्शाते हैं।

16 Sanskar

हिंदू संस्कृति के 16 संस्कार

हिंदू संस्कृति में मनुष्य की आयु, आरोग्य, सुख और समृद्धि बढ़ाने के लिए वेदों में 16 संस्कार बताए गए हैं। शरीर, मन और मस्तिष्क को पवित्र करने के लिए यह संस्कार किए जाते हैं। क्रमशः सोलह संस्कार संक्षिप्त में नीचे दिए गए हैं।

१) गर्भाधान संस्कार - उत्तम संतान की प्राप्ति के लिए, होने वाले माता-पिता को गर्भाधान से पूर्व अपने तन और मन की पवित्रता के लिए यह संस्कार करते हैं।





Tulsi Vivah

तुलसी जी कौन थी? कैसे बनी तुलसी पौधे के रूप में ? क्यों उनको पवित्र माना जाता है ? गणेश पूजा में क्यों नहीं चढ़ाई जाती तुलसी?

तुलसी गौ लोक (भगवान श्री कृष्ण का लोक) में 1 गोपी का नाम है, जो भगवान कृष्ण की सच्चे मन से पूजा अर्चना करती थी | हिंदू धर्म में तुलसी का बहुत अधिक महत्व है | पूजा, यज्ञ, हवन, शादी, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे सारे शुभ कार्य तुलसी के बिना अधूरे माने जाते है | इसके अलावा तुलसी को लेकर कुछ मान्यताएं भी हैं, जैसे भगवान गणेश को कभी भी तुलसी नहीं चढ़ाई जाती है |

सप्ताह के सात वार का महत्व

सप्ताह के किस दिन करें कौन से भगवान की पूजा | सात वार का महत्व

हिन्दू धर्म में मान्यतानुसार 33 करोड़ देवी-देवताओं का पूजन किया जाता है। इन देवी-देवताओं को विधाता ने मनुष्यों की अलग-अलग मनोकामनाओं को पूरा करने का कार्य सौंपा है। पर सप्ताह के सात दिनों में विशेष देवी-देवताओं का पूजन करने से सांसारिक मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। वैसे तो भगवान अर्चना कभी भी कर सकते है पर सप्ताह के सातों दिन का अपना विशेष स्थान है | यह सात दिन किसी न किसी देवता को समर्पित है, जो हमारे जीवन को मंगलमय बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।





महा मृत्युंजय मंत्र का अर्थ, उत्पति और महत्व

महा मृत्युंजय मंत्र का अर्थ, उत्पति और महत्व | महा मृत्युंजय मंत्र का जाप करते समय रखें इन बातों का ध्यान

हम उस त्रिनेत्रधारी भगवान शिव की आराधना करते है जो अपनी शक्ति से इस संसार का पालन - पोषण करते है उनसे हम प्रार्थना करते है कि वे हमें इस जन्म - मृत्यु के बंधन से मुक्त कर दे और हमें मोक्ष प्रदान करें |





Shree ka Arth

शुभ जीवन... कैसे होगा शुभ???????

श्री से होगा सब शुभ ... हाँ जी, श्री से ही होगा.... श्री( लक्ष्मी(स्त्री) + नारायण(पुरुष)) ऐसे तो वेदों में, ग्रंथों में श्री पर बहुत पढ़ने सुनने को मिलेगा... पर हम संसारियों के लिए जितना जरूरी है वो ये है कि #श्री मतलब #शुभ ...

Siya ke Ram

मेरे राम की जय जयकार

1.रावण कौन 👉(काम, क्रोध, लोभ, मोह, इर्ष्या, छल, कपट, अनीति, चोरी और झूठ)।
2.विभीषण कौन 👉 धर्मात्मा भाव।
3. राम कौन 👉 अपने अंतरमन में बैठा सत्य, मासूम, विनम्र भाव
अब समझिए रावण के दस सिर उसके दुर्गुणों का प्रतीक था..

नवरात्रि शक्ति बढ़ाने का पर्व

नवरात्रि शक्ति बढ़ाने का पर्व

जब युद्ध में सामने भी शक्तिशाली शत्रु हो तो समझदारी से काम लेना चाहिए, #वैष्णोदेवी माँ ने भी #भैरवनाथ का वध करने के पहले 9 माह गुफा में तपस्या की। मातारानी ने पहले (#ममतामयी रूप में) चेताया कि वापस जा ,लेकिन नही मानने पर #महाकाली का रूप लेकर #हठी भैरवनाथ का संहार कर दिया ..🙏🌸





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