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गुप्त नवरात्रि क्यों मनाते है ? | गुप्त नवरात्रि का महत्व

गुप्त नवरात्रि क्यों मनाते है ?
गुप्त नवरात्रि क्यों मनाते है ?

हिंदू धर्म में नवरात्रि त्यौहार का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्रि का भी विशेष महत्व जिसे तंत्र-मंत्र को सिद्ध करने वाली मानी गई है। गुप्त नवरात्रि के नौ दिन तक माँ दुर्गा की विधि-विधान से पूजा की जाती है। गुप्त नवरात्रि में सात्विक और तांत्रिक दोनों तरीके से पूजा की जाती है। जिसमे मुख्य रूप से साधुओं, तांत्रिकों द्वारा माँ दुर्गा को प्रसन्न, शक्ति साधना, महाकाल और तंत्र साधना के लिए मनाया जाता है। मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में माँ दुर्गा की पूजा को गुप्त रखा जाता है, इससे पूजा का फल दोगुना मिलता है।





माँ दुर्गा के इन स्वरूपों की होती है पूजा -

गुप्त नवरात्र के दौरान कई साधक दस महाविद्याओं (तंत्र साधना) के पूजन के लिए माँ कालिके, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्तिका, त्रिपुर भैरवी, माँ धूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी, कमला देवी की पूजा करते हैं। भागवत के अनुसार भगवान शिव के दो रूप होते हैं - एक शिव तथा दूसरा रूद्र उसी प्रकार माँ भगवती के भी दो रूप हैं - एक काली कुल तथा दूसरा श्री कुल। काली कुल आक्रमकता का प्रतीक होती हैं और श्रीकुल शालीन होती हैं। काली कुल में महाकाली, तारा, छिन्नमस्तिका और भुवनेश्वरी हैं। यह स्वभाव से उग्र हैं। श्री कुल की देवियों में महा-त्रिपुर सुंदरी, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला माता हैं। धूमावती माता को छोड़कर सभी सौंदर्य की प्रतीक हैं।

माँ काली (कालिके) - दस महाविद्याओं मे से अत्यंत शक्तिशाली माँ काली मानी जाती हैं, तंत्र साधना में तांत्रिक और साधक देवी काली के रूप की उपासना किया करते हैं |

माँ तारा - दस महाविद्याओं में से माँ तारा की उपासना तंत्र साधकों के लिए सर्व सिद्धिकारक मानी जाती है | माँ तारा परारूपा एवं महासुन्दरी कला-स्वरूपा हैं तथा यह सबकी मुक्ति का विधान रचती हैं |

माँ त्रिपुर सुंदरी - माँ त्रिपुर सुंदरी समृद्धिदात्री है | दक्षिणमार्गी मठो के अनुसार देवी त्रिपुर सुंदरी को चण्डी का स्थान प्राप्त है |

माँ भुवनेश्वरी - माता भुवनेश्वरी को सृष्टि की ऐश्वर्य स्वामिनी माना जाता हैं | माँ भुवनेश्वरी के मंत्र को सभी देवी देवताओं की आराधना में विशेष शक्ति दायी माना जाता है |

माँ छिन्नमस्तिका - माँ छिन्नमस्तिका को माँ चिंतपूर्णी के नाम से भी जाना जाता है, माँ की पूजा करने से भक्तों को सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है |

माँ त्रिपुर भैरवी - माँ त्रिपुर भैरवी तमोगुण एवं रजोगुण से परिपूर्ण हैं | इनकी पूजा करने से मनुष्य के मुक्ति के मार्ग खुल जाते है |

माँ धूमावती - मां धूमावती के पूजन से अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है | माँ धूमावती का रूप अत्यंत भयवाह हैं | माँ ने ये रूप शत्रुओं के संहार के लिए धारण किया था |

माँ बगलामुखी - माँ बगलामुखी स्तंभन की अधिष्ठात्री देवी हैं | इनकी उपासना से शत्रुओं का नाश होता है तथा भक्त का जीवन हर प्रकार की बाधा से मुक्त हो जाता है |

माँ मातंगी - माँ मातंगी वाणी और संगीत की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं | इनमें संपूर्ण ब्रह्माण्ड की शक्ति का समावेश हैं | माँ मातंगी अपने भक्तों को अभय फल प्रदान करती हैं |

माँ कमला - माँ कमला सुख संपदा की प्रतीक मानी गयी हैं | जो धन संपदा की आधिष्ठात्री देवी भी है, भौतिक सुख की इच्छा रखने वालों के लिए इनकी अराधना सर्वश्रेष्ठ मानी जाती हैं |

तांत्रिक सिद्धियां पाने के लिए किसी सूनसान जगह पर जाकर दस महाविद्याओं की साधना करें। नवरात्रि तक माता के मंत्र का 108 बार जाप भी करें। यही नहीं सिद्धिकुंजिकास्तोत्र का 18 बार पाठ करें। ब्रहम मुहूर्त में श्रीरामरक्षास्तोत्र का पाठ आपको दैहिक, दैविक और भौतिक तापों से मुक्त करता है।





गुप्त नवरात्रि में प्रयोग में आने वाली सामग्री -

माँ दुर्गा की प्रतिमा या चित्र, सिंदूर, केसर, कपूर, जौ, धूप,वस्त्र, दर्पण, कंघी, कंगन-चूड़ी, सुगंधित तेल, बंदनवार आम के पत्तों का, लाल पुष्प, दूर्वा, मेंहदी, बिंदी, सुपारी साबुत, हल्दी की गांठ और पिसी हुई हल्दी, पटरा, आसन, चौकी, रोली, मौली, पुष्पहार, बेलपत्र, कमलगट्टा, जौ, बंदनवार, दीपक, दीपबत्ती, नैवेद्य, मधु, शक्कर, पंचमेवा, जायफल, जावित्री, नारियल, आसन, रेत, मिट्टी, पान, लौंग, इलायची, कलश मिट्टी या पीतल का, हवन सामग्री, पूजन के लिए थाली, श्वेत वस्त्र, दूध, दही, ऋतुफल, सरसों सफेद और पीली, गंगाजल आदि।

माँ दुर्गा की गुप्त नवरात्रि में ऐसे करें पूजा -

माना जाता हैं कि गुप्त नवरात्रि के दौरान तांत्रिक और अघोरी माँ दुर्गा की आधी रात में पूजा करते हैं। माँ दुर्गा की प्रतिमा या मूर्ति स्थापित कर लाल रंग का सिंदूर और सुनहरे गोटे वाली चुनरी अर्पित की जाती है। इसके बाद माता के चरणों में पूजा सामग्री को अर्पित किया जाता है। माँ दुर्गा को लाल पुष्प चढ़ाना शुभ माना जाता है। सरसों के तेल से दीपक जलाकर 'ॐ दुं दुर्गायै नमः' मंत्र का जाप करना चाहिए।





कहा जाता है कि गुप्त नवरात्रि में की जाने वाली पूजा से कई कष्टों से मुक्ति मिलती है। माँ दुर्गा की कृपा पाने के लिए गुप्त नवरात्रि के नौ दिन कुछ व्रत नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। जाने गुप्त नवरात्रि के 9 दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं -

- गुप्त नवरात्रि के दौरान मांस-मदिरा, लहसुन और प्याज का बिल्कुल सेवन नहीं करना चाहिए।

- माँ दुर्गा स्वयं एक नारी हैं, इसलिए नारी का सदैव सम्मान करना चाहिए। जो नारी का सम्मान करते हैं, माँ दुर्गा उन पर अपनी कृपा जरूर बरसाती हैं।

- नवरात्रि के दिनों में घर में कलेश, द्वेष या अपमान नहीं करना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से बरकत नहीं होती है।

- नवरात्रि में स्वच्छता का विशेष ख्याल रखना चाहिए। नौ दिनों तक सूर्योदय से साथ ही स्नान कर साफ वस्त्र धारण करने चाहिए।

- नवरात्रि के दौरान काले रंग के वस्त्र नहीं धारण करने चाहिए और ना ही चमड़े के बेल्ट या जूते पहनने चाहिए।

- मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान बाल, दाढ़ी और नाखून नहीं काटने चाहिए।

- नवरात्रि के दौरान बिस्तर पर नहीं बल्कि जमीन पर सोना चाहिए।

- घर पर आए किसी मेहमान या भिखारी का अपमान नहीं करना चाहिए।





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