भारतीय परम्परा

सोनल जी पवार

सोनल जी पवार
सोनल जी पवार

मै सोनल पवार, महाराष्ट्र के अमरावती शहर मे रहती हूँ| मेरा जन्म महाराष्ट्र स्थित अकोला शहर मे हुआ मैने एम.ए. इंग्लिश लिटरेचर किया है| मै एक हाउसवाइफ हूँ और संयुक्त परिवार में रहती हूँ| पारिवारिक जिम्मेदारियाँ, रिश्ते, सब की खुशी, सबका अच्छे से ध्यान रखना... ये मुझे बहुत पसंद है| ये मेरी जिंदगी का बहुत अहम हिस्सा है| वैसे भी पारिवारिक रिश्ते, नाते इन सब को जोडे रखने से अपने मन को बहुत खुशी मिलती है|
इसके अलावा बात की जाये... तो मुझे लिखना और किताबे पढना पसंद है| जब मैं कॉलेज मे थी... तब से मैने लिखना शुरू किया| मुझे लिखने की प्रेरणा मेरी माँ से मिली है| उनकी लिखी हुई कविता, लेख मुझे हमेशा कुछ ना कुछ लिखने का प्रोत्साहन देते है| सकारात्मकता और चेहरे पर हँसी हमारे आत्मविश्वास को ऊपर तक ले जाती है और इसी आत्मविश्वास की वजह से... आप सभी से मै अपनी बात और अपने विचार आपके साथ साझा कर सकु ये मेरे लिये बहुत खुशी की बात है|

स्वस्तिक क्यों और कैसे लगाते है

स्वस्तिक बनाने के तथ्य | स्वस्तिक कैसे बनाया जाता है | स्वस्तिक क्यों बनाया जाता है

स्वस्तिक का उदगम संस्कृत के "सु" उपसर्ग और "अस" धातू को मिलकर बना है। संस्कृत में "सु" का अर्थ शुभ/मंगल और "अस्ती" का मतलब होना है अर्थात कोई भी कार्य शुभ और मंगल होना है। "स्वस्तिक" बनाते समय हमेशा लाल रंग का ही उपयोग किया जाता है। क्योंकि लाल रंग भारतीय संस्कृति में शुभ माना जाता है। धनवृद्धी, गृहप्रवेश, ग्रहशांति, वास्तुदोष निवारण, नई दुकान मे व्यापार की वृध्दी और लाभ होने के लिए या फिर कोई भी पूजा पाठ करने से पहले "स्वस्तिक" बनाया जाता है। इसके बगैर कोई भी पूजा की शुरुवात नही की जा सकती है।

तिलक क्यों और कैसे लगाते है

तिलक क्यों और कैसे लगाते है ? | तिलक के प्रकार | तिलक का महत्व

शास्त्रों के अनुसार कोई भी शुभ कार्य में माथे पर लगाया जाने वाला बिंदु मतलब तिलक होता है। अगर पूजा पाठ के समय हम बिना तिलक लगाए पूजा करते हैं तो वह पूजा निष्फल मानी जाती है। तिलक हमेशा मस्तिष्क के मध्य भाग (दोनों भौंहों के बीच नासिका (नाक) के ऊपर प्रारंभिक स्थल पर) पर लगाया जाता है। हमारे मस्तिष्क के बीच में "आज्ञा चक्र" होता है, जिसे "गुरु चक्र" भी कहा जाता है। मस्तिष्क के बीच में केंद्र बिंदु होने के कारण हमारी एकाग्रता और स्मरण शक्ति बनी रहती है। यह चेतन-अवचेतन अवस्था में भी जागृत एवं सक्रिय रहता है, इसलिए इसे "शिवनेत्र" अर्थात कल्याणकारी विचारों का केन्द्र भी कहा जाता है।

गुरु पूर्णिमा

गुरु पूर्णिमा

हमारे भारत को विविधता का स्वरूप माना जाता है| यहां अनेक धर्म और जाति के लोग रहते हैं | इन सबके विभिन्न प्रकार के त्यौहार, खानपान, वेशभूषा सभी मे विविधता है| सभी लोग अपने अपने त्यौहार सही ढंग से मनाते हैं| उन्हीं में से एक है हमारा भारतीय त्यौहार "गुरु पूर्णिमा" जो कि हर धर्म, हर जाति के लोग इसे मनाते हैं| "गुरु पूर्णिमा" यह हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता है| "गुरु पूर्णिमा" को व्यास पूर्णिमा भी कहां जाता है| इसी दिन महर्षि वेदव्यास जी का जन्मदिवस भी मनाया जाता है| महर्षि वेदव्यास इनको सर्वश्रेष्ठ गुरु माना गया है|





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