भारतीय परम्परा

🙏इंसान का इंसान से हो भाईचारा🙏

Bhartiya Sanskriti

महामारियों ने करोड़ों इंसानों की जान इसके पहले भी ली है, लेकिन इसके बावजूद जिस चीज ने दुनिया को फिर से खड़ा किया और जीने लायक बनाये रखा, वह है सहयोग की भावना और ईश्वर की सत्ता पर भरोसा.. इसलिए हमारे पुरखों ने हमे इंसानियत और ईश्वर पर भरोसा करना सिखाया है.. आज इंसान को इंसान से ही खतरा है..(कोरोना वाइरस)

हम डॉक्टर पर,दवाइयों पर,वकीलों पर,अपने सगे- संबंधियों पर विश्वास बड़े आसानी से कर लेते हैं पर हम उस परमसत्ता जो वास्तव में है उस पर नही करते या last option के रूप में करते हैं..

ईश्वर ने हमे बहुत सुंदर धरती दी थी रहने को,उसको कुरूप हमने किया है.. ईश्वर ने हमें बहुत सुंदर जीवन दिया मासूमियत और ईमानदारी से भरे बचपन के रूप में... उसे कुरूप हमने किया अपने स्वार्थबस निंदा, झूठ, ठगी, लालच लूटमार,बलात्कार,बेईमानी,छल-कपट, धर्म के नाम पर झगड़े, सत्ता के नाम पर झगड़े से..उसकी सजा हमें समय समय पर अनेक बीमारियों के रूप मे ं,प्रलय के रूप में मिलती रही है पर हम शांत नहीं हुए, हमने चांद पर कब्जा करना चाहा, मंगल में भी जीवन की संभावना ठूँठ रहे हैं , पड़ोसी देशों में कब्जा करना चाहा..

हमारे भारत की पहचान #सादा #जीवन #उच्च #विचार रही है पर हमने इसका उल्ट #उच्च #जीवन,#निम्न #विचार वाली जीवनशैली बना ली जीवन को केवल मशीन बना डाला ..हाय पैसा,हाय पैसा ..हर वो चीज जो हमारी सुविधा के लिए थी ,उनका miss use किया ..

उच्च विचार के लिए आज लोग यही कह देते हैं कि ये सब practical life में मुश्किल है, मुश्किल हैं ना पर नामुमकिन तो नही..





कोरोना वायरस
कोरोना वायरस

कलयुग इतना बढ़ रहा है कि केवल स्वार्थ पसर रहा है.. जो आज भी दुनिया टिकी है ना और हम सुरक्षित हैं. उन पॉजिटिव लोगों के कारण ही जो हिमालय में एकांत में बैठकर ,जंगलों में बैठकर ,अपने अपने तपोभूमि में बैठकर निःस्वार्थ विश्वशान्ति की प्रार्थना करते हैं.. ये ही सूक्ष्म दुआयें कहलाती हैं .. जो हमारे प्रधानमंत्री #मोदी जी ने कहा कि 22 मार्च को सभी जन एक साथ शाम 5 बजे थाली, घंटा, घंटी बजाए जिससे sound frequency जो कि वैज्ञानिक शब्द है उत्पन्न होगी जिससे कीटाणु का खात्मा होगा और उत्साहवर्धन होगा अरे... इसी को तो हमारे ऋषि-मुनि, पूर्वज, घर के बड़े बुजुर्ग दिया-बत्ती कहते रहे हैं.. कहा जाता है कि घंटी ,घंटा,शंख की आवाज जहाँ तक जाती है, वहाँ से नकारात्मक ऊर्जा, बीमारियां दूर भाग जाती हैं(पुराने लोग ज्यादा पढ़े लिखे नही तो यह कह देते थे कि भूत प्रेत नही आते)..

मुझे लगता है जैसे ये #कोरोना हमे वापस फिर हमारी भारतीय संस्कृति अपनाने को कहने आया है.. देखो ना हम बाहर से आकर हाथ पैर धोने लगे, घर का शुद्ध सादा खाना खाने लगे, घर के लोगों के साथ समय बिताने लगे,हाथ मिलाने की जगह हाथ जोड़ने लगे बस जोड़ते वक्त #राम #राम या किसी भी भगवान का नाम और लेने लगें,आज बच्चियां और महिलाएं सुरक्षित है उनके साथ गलत करने के पहले व्यक्ति सोचेगा कि कहीं ये #कोरोना से ग्रस्त ना हो..please अपनी संस्कृति को गर्व से अपनाए ...
आप लोगों को याद होगा पहले के समय में आंगन में बाल्टी भर पानी रखा होता था, बाहर पैर हाथ धोकर आओ उसका कारण यही था कि अपने व्यापार में, लेन-देन में किसी से वाद विवाद हुआ हो या और कोई tension रहा हो दिनभर .. बाहर ही सारी निगेटिविटी बहा कर अंदर आओ ,अंदर आपका परिवार आपका इंतजार कर रहा है ..जिन्हें शांति, प्रेम और आपका समय चाहिये..

प्रकृत्ति हमें ईश्वर से मिलती है, विकृति हम निर्मित करते हैं.. पुरानी कहावतें यूँ ही नही बनी हैं .. करे कोई, भरे कोई,.. गेंहू के साथ घुन भी पिसता है.. घर मे भी किसी एक के अच्छे या बुरे कर्म का, व्यवहार का फल सबको मिलता है.. इसलिए अच्छा बोलें, अच्छा देखें, अच्छा सुने ,अच्छा करें...

#कोरोना ..कोरोना.. अब बस भी करो ना.. जितनी बार हम कोरोना को बोल रहे हैं ,सोच रहे हैं उससे संबंधित msg आगे भेज रहे हैं ..हम और निगेटिव हो रहे हैं यानी कमजोर हो रहे हैं और कमजोर शरीर को वाइरस जल्दी शिकार बनाता है ..अब जितनी बार भी msg करें उत्साह वाले करें.. ईश्वर का ध्यान करें नाम जाप करें ..🌸राम जी के नाम से तो पाथर भी तारे, जो ना जपे राम नाम.. वो हैं किस्मत के मारे🌸 जो होना होगा, वो होगा ही.. बस सुरक्षित रहें..
मै तृप्ति आधुनिक भी हूँ पर अपनी संस्कृति से प्यार भी करती हूँ इसे चाहे तो कोई दकियानूसी विचार कह ले .. आओ अपनी भूली संस्कृति को अपनाते हुए एक नई शुरुआत करें ...





©2020, सभी अधिकार भारतीय परम्परा द्वारा आरक्षित हैं। MX Creativity के द्वारा संचालित है |