Bhartiya Parmapara

जीवच्छ्राद्ध क्या है? जानें स्वयं का पिंडदान...

शास्त्रों में स्वयं का पिंडदान (जिसे 'आत्म-पिंडदान' या 'जीवच्छ्राद्ध' कहा जाता है) करने की भी एक मान्यता मिलती है। सामान्यतः पिंडदान मृत्यु के पश्चात संतानों द्वारा किया जाता है, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में व्यक्ति अपने जीवित रहते हुए भी अपने निमित्त पिंड अर्पण अ...

पितृ पक्ष में बोधगया का महत्व | पिंडदान, तर्प...

पितृ पक्ष (श्राद्ध) सनातन धर्म की वह महत्वपूर्ण अवधि है, जब लोग अपने दिवंगत पूर्वजों अर्थात् पितरों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और आदर व्यक्त कर उनको स्मरण करते हैं, उनके निमित्त श्राद्ध, तर्पण तथा पिंडदान जैसे धार्मिक कर्म करते हैं। इन दिनों देश के अनेक तीर्थस्थलों पर...

भारतीय संस्कृति में नाग: नाग पंचमी का महत्व,...

नाग पंचमी श्रावण मास की शुक्ल पक्ष पंचमी को मनाई जाती है। इस वर्ष यह पर्व 17 अगस्त, 2026 को मनाया जाएगा। पौराणिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने यमुना नदी में कालिया नाग का दमन किया था, जिससे वृंदावनवासियों को उसके विष से मुक्ति मिली। इस विजय की स्मृति में ना...

सिख धर्म के बारहमाहा में सावन : आध्यात्मिक मि...

भारतीय साहित्य में बारहमासा एक प्राचीन और लोकप्रिय काव्य-विधा है। संस्कृत, अपभ्रंश, ब्रज, अवधी, राजस्थानी, पंजाबी और अन्य भारतीय भाषाओं में कवियों ने बारह महीनों के माध्यम से प्रकृति, मानवीय भावनाओं तथा प्रेम-विरह का अत्यंत मार्मिक चित्रण किया है। सिख गुरुओं ने इस परं...

लोहड़ी पर्व: ऊर्जा, उल्लास और कृतज्ञता का लोक...

लोहड़ी भारत के उत्तर क्षेत्र, विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में मनाया जाने वाला एक प्रमुख लोकपर्व है। यह पर्व हर वर्ष 13 जनवरी को मनाया जाता है और शीत ऋतु के अंत तथा सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक माना जाता है। लोहड़ी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृ...

षटतिला एकादशी व्रत: महत्व, पूजा विधि, कथा और...

षटतिला एकादशी माघ मास के कृष्ण पक्ष में आती है। अपने नाम के अनुरूप इस एकादशी में तिल का विशेष महत्व होता है। ‘षट’ का अर्थ है छः और ‘तिला’ का अर्थ है तिल। इस दिन तिल के छह प्रकार से प्रयोग किए जाते हैं। यह एकादशी शुभकारी एवं मंगलकारी मानी जाती ह...

धनतेरस: समृद्धि का नहीं, संवेदना का उत्सव

धनतेरस का अर्थ केवल ‘धन’ नहीं बल्कि ‘ध्यान’ भी है — ध्यान उस पर जो हमारे जीवन को सार्थक बनाता है। यह त्योहार हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि समृद्धि का असली अर्थ क्या है। अगर घर में प्रेम है, परिवार में एकता है, मन में शांति है, और समाज में करुणा है—तो यही सब...

नवरात्रि में कोलू/गोलू: परंपरा और आधुनिकता का...

भारत की सांस्कृतिक धारा में नवरात्रि का पर्व एक विशेष स्थान रखता है। जहाँ पूर्वी भारत में दुर्गा पूजा का भव्य आयोजन होता है, वहीं दक्षिण भारत में यह उत्सव अपनी आध्यात्मिक गहराई, कलात्मक परंपराओं और सामुदायिक सहभागिता के कारण विशेष रूप से मनमोहक है। नवरात्रि का पर्व पू...

भक्ति से विज्ञान तक: हरितालिका तीज का बहुआयाम...

हरितालिका तीज भारतीय संस्कृति का ऐसा पर्व है, जिसके नाम में ‘हरित’ का आशय भगवान शिव से और ‘आलिका’ का अर्थ सखी से है। पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने अपनी सखियों की सहायता से हिमालय पर्वत पर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठ...

दक्षिण भारत में रक्षाबंधन का बदलता स्वरूप

मैं एक दक्षिण भारतीय ब्राह्मण परिवार में जन्म लिया और मेरा जन्मस्थान जयपुर, राजस्थान है। जहाँ एक ओर मैंने उत्तर भारत की रक्षाबंधन की जीवंत परंपरा को महसूस किया, वहीं बचपन से ही मैंने अपने घर में दक्षिण भारत की वैदिक परंपराओं को भी आत्मसात होते देखा। यह सांस्कृतिक...

बुद्ध पूर्णिमा का महत्व व संदेश

बुद्ध पूर्णिमा, जिसे "वैशाख पूर्णिमा" भी कहा जाता है, भारतीय संस्कृति और अध्यात्म का एक अत्यंत पावन पर्व है। यह दिन भगवान गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति (बोधि) और महापरिनिर्वाण – तीनों घटनाओं की स्मृति में मनाया जाता है। यह पर्व वैशाख माह की पूर्णिमा को आता...

महावीर स्वामी जयंती: उपदेश, पंचशील और अहिंसा...

महावीर स्वामी जयंती जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। यह पर्व चैत्र शुक्ल त्रयोदशी को धूमधाम से मनाया जाता है। भगवान महावीर ने अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह के सिद्धांतों का प्रचार किया, जो आज भी मानवता के कल्...

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