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महाभारत की बड़ी सीख: शक्ति पर सत्य और धर्म की विजय का संदेश

महाभारत की महान सीख: शक्ति से बड़ी सत्य की विजय

महाभारत हमें एक बड़ी सीख देती है कि विजय केवल बाहुबल, अस्त्र-शस्त्र या सत्ता से नहीं होती, बल्कि सिद्धांत, धर्म और सत्य से होती है। सही और ग़लत का चुनाव ही मनुष्य का स्थान इतिहास में निर्धारित करता है और इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हमें महाभारत के इन महान पात्रों के माध्यम से देखने को मिलता है।

भीष्म पितामह: प्रतिज्ञा बनाम धर्म

भीष्म पितामह महाभारत के सबसे शक्तिशाली और आदरणीय योद्धाओं में से एक थे, किन्तु इसके बावजूद वे ग़लत सिंहासन के साथ खड़े रहे। उन्होंने यह जानते हुए भी कि कौरव अधर्म के मार्ग पर हैं, हस्तिनापुर की सत्ता और अपनी प्रतिज्ञा को धर्म से ऊपर रखा। भीष्म पितामह का पतन इस बात का प्रतीक है कि जब शक्ति सिद्धांत से अलग हो जाती है, तो वह हार में बदल जाती है।

गुरु द्रोणाचार्य: ज्ञान बनाम निष्पक्षता

द्रोणाचार्य विद्या, ज्ञान और गुरु परम्परा के प्रतीक थे, किन्तु उनका ज्ञान भी उन्हें धर्म के मार्ग पर नहीं रख सका। पुत्र मोह और पक्षपात ने उनके विवेक को ढंक लिया। उन्होंने यह जानते हुए भी कि दुर्योधन अन्याय कर रहा है, उसी के पक्ष में युद्ध किया। द्रोणाचार्य का अंत यह दर्शाता है कि विद्वता तब तक अधूरी है, जब तक वह निष्पक्षता और सत्य से जुड़ी न हो।

दानवीर कर्ण: मित्रता बनाम सत्य

कर्ण के पास भी हर वह अवसर था कि वह सत्य का साथ चुने, परन्तु उसने मित्रता और कृतज्ञता के नाम पर अधर्म का साथ दिया। उसने सत्य को पहचानने के बाद भी ग़लत का साथ नहीं छोड़ा।

इतिहास और हमारे कर्म

महाभारत का संदेश यही है कि ग़लत के साथ खड़े रहकर कोई व्यक्ति सही नहीं बन सकता, चाहे वह कितना ही शक्तिशाली, ज्ञानी और वीर क्यों न हो। इतिहास केवल कर्मों को देखता है; जो व्यक्ति अधर्म के साथ खड़ा होता है, उसका नाम इतिहास में पराजितों की सूची में दर्ज होता है।

जीवन में तटस्थ (Neutral) रहना भी कई बार अधर्म का समर्थन बन जाता है, इसलिए सही या ग़लत का चुनाव करने में हमें अपने विवेक की आवश्यकता होती है।

एक प्रार्थना: धर्म के पथ पर चलने का संकल्प

हे सर्वशक्तिमान! जीवन में सही के साथ खड़े होने के लिए साहस चाहिए, त्याग चाहिए और कभी-कभी अपनों के विरुद्ध जाने का संकल्प भी चाहिए। अंततः विजय उसी की होती है जो सिद्धांतों से समझौता नहीं करता और जो सही है, धर्म है, उसी के साथ चलता है।

ईश्वर हमें इतना विवेक अवश्य देना कि जीवन के हर छोटे-बड़े निर्णय में हम हमेशा धर्म के साथ रहें, कभी कोई ग़लत फैसला न करें, कभी किसी का हक़ छीनने का प्रयास न करें और कभी किसी के अहित के विषय में न सोचें।



            

 

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