Bhartiya Parmapara

Preeti Jhanwar

Preeti Jhanwar
Preeti Jhanwar

'महाराजाओं की भूमि 'राजस्थान' में अजमेर जिले के ब्यावर शहर में जन्म हुआ। बचपन से सत्संग का माहौल घर पर देखा, उसके साथ साथ कुछ करके दिखाने की ललक मन में हमेशा से बनी रही है। कंप्यूटर साइंस में पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा करके सॉफ्टवेयर डेवलपर के रूप में प्राइवेट इन्फोटेक कंपनी के साथ काम करना शुरू किया। वहां मुझे वेबसाइट डिजाइनिंग का नेतृत्व करने और शुरू करने का अवसर मिला। अपनी शादी के बाद मैं तथा कथित भारत की स्वप्न नगरी - मुंबई चली आई। शुरू में लगभग एक साल तक 1-2 कंपनियों में काम करते वक्त यह तो समझ में आ गया था कि मुंबई में यात्रा करना मेरे लिए सरल नहीं होगा, दुसरी तरफ अपने काम से जुड़े रहने की इच्छा शक्ति तीव्र होने की वजह से खुद का उद्यम शुरू करने का फैसला किया। पता था राहें आसान नहीं थी फिर भी चल पड़ी उन राहों पर। एमएक्स क्रिएटिविटी के नाम से इसकी शुरूआत की। लगभग 10 वर्षों के बाद कॉर्पोरेट, ब्रांडिंग, ई कॉमर्स पोर्टल, शादी के लिए ई-कार्ड और अन्य कार्यों, डिजिटल और सोशल मीडिया मार्केटिंग के लिए वेबसाइट डिजाइनिंग से ब्रांड डिजाइनिंग चला रही हूं। इन सभी ब्रांड के तहत कई और भी सेवाएं प्रदान की जा रही हैं -एमएक्स क्रिएटिविटी (MXCreativity), किंग्स वेड्स क्वीन्स (Kinges Weds Queens), और भारतीय परम्परा (Bhartiya Parampara)

होली क्यों मनाते है? | होली का महत्व

होली क्यों मनाते है? | होली का महत्व

भारत के अन्य त्योहारों की तरह होली का त्योहार भी बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है, जिसे रंगों के त्योहार के रूप में फाल्गुन महीने की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। होली रंगों के साथ साथ वसंत ऋत...

नीम की डाली / टहनी से बड़ी (सातुड़ी) तीज की पूजा क्यों की जाती है ?

नीम की डाली / टहनी से बड़ी (सातुड़ी) तीज की पूजा क्यों की जाती है ?

हिन्दू धर्म में त्योहारों का बड़ा महत्व है | उसमे भी सावन का महीना मस्ती, प्रेम और उत्साह का महीना माना जाता है। इस महीने में महिलाओं का सौंधा-सा पर्व सातुड़ी तीज रक्षाबंधन के तीसरे दिन के बाद आती...

गोंद के लड्डू

गोंद के लड्डू

सामग्री - 1 किलोग्राम आटा (उड़द की दाल का आटा भी ले सकते है), 100 ग्राम किशमिश, 100 ग्राम काजू, 250 ग्राम बादाम, 50 ग्राम पिस्ता, 250 ग्राम गोंद, 100 ग्राम खसखस, आवश्यकत...

आदि पेरुक्कु का त्योहार | तमिलनाडु का मानसून त्योहार

आदि पेरुक्कु का त्योहार | तमिलनाडु का मानसून त्योहार

छठ पूजा सूर्य, उषा, प्रकृति, जल, वायु और उनकी बहन छठी म‌इया को समर्पित है ताकि उन्हें पृथ्वी पर जीवन देने के लिए धन्यवाद और शुभकामनाएं देने का अनुरोध किया जाए। छठ पूजा चार दिनों तक चलने वाला ल...

साल में कितनी बार नवरात्रि आती है | Importance of Navaratri

साल में कितनी बार नवरात्रि आती है | Importance of Navaratri

हम में से बहुत कम लोग यह जानते है कि एक साल में 4 बार नवरात्रि पड़ते हैं। साल के प्रारम्भ में पहले माह चैत्र में पहली नवरात्र होती है, फिर चौथे माह आषाढ़ में दूसरी नवरात्र पड़ती है, इसके बाद अश्विन...

महा शिवरात्रि | शिव की पूजा कैसे करें | बारह ज्योतिर्लिंग

महा शिवरात्रि | शिव की पूजा कैसे करें | बारह ज्योतिर्लिंग

कहा जाता है कि आदि अनादि काल तक शिव ही सत्य है। भगवान शिव के प्रति सबको सच्ची आस्था है इसलिए ही शक्ति स्वरूप शिव-शंकर को अनंत माना गया है। पुराणों के अनुसार भगवान शिव क...

ऋषि पंचमी का त्योहार | माहेश्वरी रक्षाबंधन

ऋषि पंचमी का त्योहार | माहेश्वरी रक्षाबंधन

जैसे के नाम से ही पहचाना जा सकता है कि यह त्योहार ऋषियों से जुड़ा है, हिन्दू पंचांग के भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष की पंचमी को ऋषियों की पूजा करके यह त्योहार मनाया जाता है।

मसूड़ों में खून निकलना और सूजन आना

मसूड़ों में खून निकलना और सूजन आना

1/4 चम्मच हल्दी पाउडर, 1 चुटकी नमक, 2-3 बूंद सरसों का तेल लें, सबको अच्छी तरह मिलाएं और प्रतिदिन दांतों और मसूड़ों पर धीरे-धीरे मालिश करें। इससे दांत सफेद और मसूड़े मजबूत हो जाते हैं।

दही हांडी | दही हांडी पर्व क्यों और कैसे मनाया जाता है ?

दही हांडी | दही हांडी पर्व क्यों और कैसे मनाया जाता है ?

 कृष्ण जन्माष्टमी या गोकुलाष्टमी के एक दिन बाद भाद्रपद की नवमीं को दही हांडी का पर्व बहुत हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस पर्व में एक मिट्टी की हांड़ी (मटकी) में दही - माखन, दूध, फूल औ...

खुजली (Itchy Skin)

खुजली (Itchy Skin)

शरीर के किसी भी हिस्से में खुजली होने पर लहसुन को सरसों के तेल में उबाल कर ठंडा होने दे। अब इस तेल को कुछ दिनों तक लगते रहे, खुजली मिट जाएगी।

एक और तरीका अपना सकते है - खोपरे के तेल में कपू...

शरीर पर दाद

शरीर पर दाद

शरीर पर दाद को जड़ से हटाने का रामबाण नुस्खा। 
लहसुन को जला ले अब उसकी राख (भस्म) को शहद में मिला कर दाद पर दिन में 2-3 बार लगा ले। 

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