Bhartiya Parmapara

विकल्प | बिना पटाखों वाली मस्ती भरी दीपावली

दीपावली कुछ दिनों बाद आने वाली थी पर अब की बार मौसम भी कुछ विचित्र सा गर्मी लिए हुए था साथ ही वायु का प्रदूषित होना भी दुविधा का कारण बना हुआ था। वायु प्रदूषण की भयाभयता का अंदाजा लगाते हुए सरकार की मंशा के अनुरूप स्थानीय प्रशासन ने भी पटाखों की दुकान व पटाखे चलाने पर सख्ती से पाबंदी लगा दी थी।

बच्चों ने जब ये सुना कि अब की बार दीपावली पर पटाखे चलाये नहीं जायेंगे तो उन्हें बड़ा ही बुरा लगा। आज दीपावली की सांझ, सभी बच्चे मायूस, तब ही अचानक पड़ोस के अंकल जी की छत से छोटे-छोटे पटाखों के चलने सी आवाज आई। 
ये सुन सभी बच्चे अपनी-अपनी छतों पर चढ़कर देखने लगे। तो वो देखते हैं कि मोनू और उसकी बहन मच्छर मारने के रेकिट से मच्छर मार रहे हैं और उस आवाज से पटाखों का सा आनंद ले रहे हैं।  ये खबर तत्काल ही पूरे शहर में फैल गई, देखते ही देखते सभी बच्चे अपनी-अपनी छतों पर रेकिट लेकर चढ़ गये और एक अलग ही अंदाज से दीपावली मनाने लगे।

लगता आज मच्छरों की शामत आ गयी थी पर बच्चों को पटाखों का विकल्प मिल चुका था कुछ शरारती बच्चे तो गली मोहल्लों की सड़कों पर भी दीपावली मनाते देखे गये। पता नहीं पटाखे चलते तो हवा प्रदूषित होती या नहीं पर मोनू के विकल्प ने शहर को मच्छर मुक्त अवश्य कर दिया। 

 

                                    

                                      

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